'कल के पृष्ठ पलटकर देखे
सब पर बिंब उसी के देखे'
बहुत उदास
यह मधुमास
वह नही मेरे पास।
वन में पहुँच गई पुरवाई
नयनों मे स्मृति भर आई,
जो छूटे टूटे पल अपने
वो बीते मौसम के सपने,
चुप्पी साधे फूलों के संग
करते हैं इक आस-
वह आएगा पास,
बहुत उदास यह मधुमास-तुम बिन।
दूर झरोखे पर जो देखी
छवि हथेली पर आ बैठी
कल के पृष्ठ पलट कर देखे
सब पर बिंब उसी के देखे,
क्षण रोपे वो विकसित होगें,
पुष्पित है विश्वास
वह आएगा पास,
बहुत उदास यह मधुमास-तुम बिन।
--प्रदीप सेठ “सलिल”

