ऐसा क्यों लगता है 

              मुझे

कि तू एक चिड़िया है-कोमल

आयु की नदी में खेलती सी,

और मैं एक वृक्ष

नदी के किनारे पर का।

अपनी लम्बी फैली सी  शाखाओं पर संभाले

                              तेरा नीड़।

ऐसा क्यों लगता है मुझे

कि तू एक चिड़िया है-कोमल

और मैं वृक्ष

तेरा नीड़ संभाले।


---प्रदीप सेठ “सलिल”