ख़ामोश है चूड़ी नही पाजेब का स्वर हे ,
उन्नति के दौर में एक ये भी ख़बर है ,
दमयंती को आंसू नही न नल को पीड़ा है,
वो कल्पना के द्वीप का बंधन कहाँ पर है।
--प्रदीप सेठ "सलिल"


ख़ामोश है चूड़ी नही पाजेब का स्वर हे ,
उन्नति के दौर में एक ये भी ख़बर है ,
दमयंती को आंसू नही न नल को पीड़ा है,
वो कल्पना के द्वीप का बंधन कहाँ पर है।
--प्रदीप सेठ "सलिल"