"पतझर से सांझा कर लिया फूलों ने 'अश्क़' को"



आँसू जो तेरी याद में अल्फ़ाज़  हो  गए,

आंचल किसी के ख़्वाब का बारहा भिगो गए।


वो  गीतकार  ‘आईना’  मेरा है दोस्तों,

उसके बुने शेर ओ सुख़न बरसात हो गए।


मेरा लुटा जहान सरमाया है मिल्कियत,

यूं ज़िन्दगी में वो मेरा मुकाम हो गए।


पतझर से सांझा कर लिया फूलों ने 'अश्क़' को,

शबनम से पुर ज़मीं ओ आसमां भिगो गए।


दूरी ने कितना मुख़्तसर सा फ़ासला किया,

दर्द ओ अलम हर सिम्त  मेरे साथ हो गए।

---प्रदीप सेठ सलिल