तिनकों का क़फ़स तोड़ के एक घर बना दिया,

आंख  के आंसू  को  समुन्दर  बना  दिया।

कैसे  खिलौने  दे  दिए  बच्चों  के हाथ में,

सुबह को  स्याह रात का मंज़र बना दिया।


---प्रदीप सेठ "सलिल"