अब चलो कुछ देर हम कुछ प्यार की बातें करें,
जो निरंतर गिर रही दीवार की बातें करें,
'संबंध' का श्रृंगार कर कुछ देर मुस्काऐं जरा,
सद्भावना के गीत हों सत्कार की बातें करें।
---प्रदीप सेठ सलिल


अब चलो कुछ देर हम कुछ प्यार की बातें करें,
जो निरंतर गिर रही दीवार की बातें करें,
'संबंध' का श्रृंगार कर कुछ देर मुस्काऐं जरा,
सद्भावना के गीत हों सत्कार की बातें करें।
---प्रदीप सेठ सलिल