बड़ी अजीब दास्ताँ है, 

कोई मिल के दूर है 

तो कोई दूर से पास में है,

हम अकेले है ये कहा उनको अह्सास है, 

बेचैनी, बेताबी बढ़ती है जब उनके गुफ़्तगू की रात ना हो, 

है चलाना मुझे अकेले ही अपनी मंजिल पर, 

काश इस मंजिल मे तेरा साथ हो