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लम्हा


किताब हांथों में थी, शाम की चाय की चुस्कियों के साथ,नींद अंगडायो में छुप ने लगीअह्सास हुआ उनकी आरजू कातो दिल ने कहाजो लम्हा बीत गया वो भी अच्छा था

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