वो नदिया की धार सी हैजो मिले तो संगम सा हो जाऊवो सावन की पहली बारिश मिलेतो मै उपवन हो जाऊ,लिखी है लाखो कहानियांवो मिले तो मै ग्रंथ हो जाऊ ,,
वो नदिया की धार सी हैजो मिले तो संगम सा हो जाऊ
वो सावन की पहली बारिश मिलेतो मै उपवन हो जाऊ,
लिखी है लाखो कहानियांवो मिले तो मै ग्रंथ हो जाऊ ,,