*देर रात हो गई है पूरा मोहल्ला शांत चादनी की रात में सो रहा है, इस शांति को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे दुनिया थम गई है, मौसम भी अपनी खुशियां बेखर रहा है,और मानो जैसे तारे खिलखिला के हस रहे है मुझे देखकर, मेरे मन में ख्याल आया कि आज इस रात को देखकर कुछ सीख लू , इस शांति भारी रात में कितना सुकून ,आनंद, मन शांत है जैसे कोई विडम्बना ही नहीं हो, मस्तिष्क में को अनेकों विकार उठते थे जैसे गायब हो गए हो, इस तन्हाई भारी रात में मुझे अकेलेपन का अहसास नहीं हो रहा है, रात ढल रही है लेकिन जैसे जैसे सुबह का बिगुल बजने वाले होगा वैसे वैसे ही फिर से इस सुकून में बिघ्न पड़ने लग जाएगा ,काश कि ऐसा होता की रात यूहीं थम जाती और मै इस स्वक्ष चांदनी में खोया रही, लेकिन प्रकृति का नियम कोई बदल नहीं सकता ,, आज मै और मेरी तन्हाई दोनों मुझसे बाते करती है, और मुझे अच्छा लगता है,, वैसे आज ख्याल आया कि आज टी दिवस है एक काश बात है इस टी की, सुबह की शुरुआत मानो जैसे चाय के बिना अधूरी हो,,आज भी मुझे याद आता है वो पल जब मै एक बार चाय पीने के लिए इस खुशनुमा रात में निकाल गया था स्टेशन पे अपने एक मित्र के साथ , चाय की अपनी अलग ही इक पहचान है ,वैसे चाय का किस्सा कोई नया नहीं शादियों से लोग इसके दीवाने है , चाय की खोज चीन में हुई थी और ये कब पूरी दुनिया में सबसे चहेती बन गई इसका अंदाजा लगा लेना मुश्किल है, बरहाल आजकल चाय के बिना तो जैसे दिन गुजरता नहीं है, हमारे हिंदुस्तान में चाय की खेती की जाती है जो मुख्य रूप से दार्जलिंग में अधिक मात्रा में इसका उत्पाद होता है, इस खुशनुमा रात के बारे में बात करते करते कब मै चाय के उपर आ गया लेकिन मेरे मन में चाय के लिए हमेशा से एक अच्छे ख्याल रहे है, देर रात जग के बालकनी में  आम भाषा में काली चाय को कप में लेके पीने का मजा अपने आप में अतुल्य है, चाय की अपनी अलग कहानी है दोस्तो चाय की कीमत आज के दौर में सबसे अहम है चाय की वजह से कोई देश प्रधानमंत्री भी बन सकता है ,ये खबर जब मैंने न्यूज में देखी तो मुझे अपनी चाय के उपर और गर्व महसूस होता है अब, लेकिन जो भी हो ,अब रात के उस पक्ष मै पहुंच चुका ही की अब पक्षियों कि चहचहाने की खूबसरत आवाज मेरे मन को एक संगीतमय धुन का अहसास करा रही है, खामोश में अलग सुकून है और इस सुकून का अहसास केवल रात्रि करवाती है,,   मेरे मन के विचार (प्रदीप सरोज)*