
*देर रात हो गई है पूरा मोहल्ला शांत चादनी की रात में सो रहा है, इस शांति को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे दुनिया थम गई है, मौसम भी अपनी खुशियां बेखर रहा है,और मानो जैसे तारे खिलखिला के हस रहे है मुझे देखकर, मेरे मन में ख्याल आया कि आज इस रात को देखकर कुछ सीख लू , इस शांति भारी रात में कितना सुकून ,आनंद, मन शांत है जैसे कोई विडम्बना ही नहीं हो, मस्तिष्क में को अनेकों विकार उठते थे जैसे गायब हो गए हो, इस तन्हाई भारी रात में मुझे अकेलेपन का अहसास नहीं हो रहा है, रात ढल रही है लेकिन जैसे जैसे सुबह का बिगुल बजने वाले होगा वैसे वैसे ही फिर से इस सुकून में बिघ्न पड़ने लग जाएगा ,काश कि ऐसा होता की रात यूहीं थम जाती और मै इस स्वक्ष चांदनी में खोया रही, लेकिन प्रकृति का नियम कोई बदल नहीं सकता ,, आज मै और मेरी तन्हाई दोनों मुझसे बाते करती है, और मुझे अच्छा लगता है,, वैसे आज ख्याल आया कि आज टी दिवस है एक काश बात है इस टी की, सुबह की शुरुआत मानो जैसे चाय के बिना अधूरी हो,,आज भी मुझे याद आता है वो पल जब मै एक बार चाय पीने के लिए इस खुशनुमा रात में निकाल गया था स्टेशन पे अपने एक मित्र के साथ , चाय
