प्लेटफॉर्म पे कईयोंको देखते है अशांत मनकी पीड़ा लिए कुछ करने कीचाहत से हर रोज जिल्लत उठते है,हम इंसान ही है जो दूसरों को समझनहीं पते है,ये उच्च ओहदे और मौकापरस्तीकी आदतों सेकितने बेचारे बागी बनजाते है,