जब जब मैंने सोचाकी सारी उलझनों से मुक्त होकरखुद की अन्तर्चेतना से रूबरू हूंतब कोई न कोई विकट प्रसंगमेरी आत्मचिंतन की शैलीसे बेखबर कर देता है
जब जब मैंने सोचाकी सारी उलझनों से मुक्त होकर
खुद की अन्तर्चेतना से रूबरू हूंतब कोई न कोई विकट प्रसंग
मेरी आत्मचिंतन की शैलीसे बेखबर कर देता है