"खङा था अकेले दुनिया की भीड़ में
लोग आते-जाते गए मेरे करीब से,
देखा उनको गौर से मिला ना कोई उनके जैसा ,
चाहत थी इस दिल की मूङ कर देख लूँ उनकी निगाह में,
निगाह भी उनकी खामोश थी,
है दिल मे कई आरजू ,लेकिन रह गए सारे आरजू इस दिल मे ,
कैसे कहु उनकी चाहत मुझसे कम थी,
चाहत ही तो ले आयी मुझे इस मोड़ पे,"


