दिए बुझाए शाम से चाँदनी की ताक मे हूँरौशन करेगी वो घर मेरा इसी फ़िराक मे हूँशायद खबर नही उसे मेरे आशियाने कीमै तो दिल में छूपे किसी के मकान मे हूँ✍️✍️ प्रदीप पाठक
दिए बुझाए शाम से चाँदनी की ताक मे हूँरौशन करेगी वो घर मेरा इसी फ़िराक मे हूँशायद खबर नही उसे मेरे आशियाने कीमै तो दिल में छूपे किसी के मकान मे हूँ
✍️✍️ प्रदीप पाठक