मुखौटा
दूध से न धुलो इतना ,
कि हर रंग उतर जाए !
मुखौटे में छिपा तुम्हारा ,
असली चेहरा नजर आ जाए !
तन तो धो लोगे ,
पर मन का दाग कैसे मिटाओगे !
खुद की पहचान याद नहीं ,
दुनिया को क्या बताओगे !
बदल सकते हो आईना ,
यह चेहरा न बदल पाओगे !
अँधेरे की दोस्ती में ,
उजालो में ठोकर खाओगे !
~ प्रदीप कुमार वर्मा


