किसी के आस में 
किसी के प्रयास में 
पल पल चलती
खामोश सांस में 
विचलित जब मन होता है
नीरस जब जीवन होता है
पतझड़ से आहत,
निर्जन उपवन होता है
मन की श्रद्धा,
मन की शक्ति बन जाता है।
हे देव ! तेरे चाहत में जो रम जाएं
धन्य उसका जीवन बन जाता है ।।

~प्रदीप कुमार वर्मा