बंधन

तोड़ दो मेरे बंधन ,मुक्त मुझे रहने दो !

मै मानव हूँ , मुझे मानव ही रहने दो !


करना था जो तुमने किया ,

अब मुझे भी कहने दो ,

पतित रहा यह जीवन मेरा ,

अब नव-जीवन रचने दो !

मै मानव हूँ , मुझे मानव ही रहने दो !


मैंने चाहा जिन खुशियों को ,

जीवन भर मुझसे दूर रही वो ,

मधुर-मनोहर इस आनंद को ,

जीवन कण में बसने दो !

मै मानव हूँ , मुझे मानव ही रहने दो !


तन स्वतंत्र पर अभागा ,

मन ही मेरा कैद रहा ,

इस निरापराध कैदी को ,

अब मुक्त गगन में उड़ने दो !

मै मानव हूँ , मुझे मानव ही रहने दो !


जिन स्वपनो का दमन किया ,

उन स्वपनो का प्राण मुझे दो ,

मानव होने का ,

अब सच्चा सम्मान मुझे दो !

मै मानव हूँ , मुझे मानव ही रहने दो !


प्रदीप कुमार वर्मा