बारिश की बूंदों का
टपकना ,बरसना
मिट्टी को महकाना
नव सृजन के बीज को
अमृत दे
हरितीमा सा छा जाना !
वरदान है प्रकृति का
निस्वार्थ ,निर्मोह
पुष्प सा जग को महकाना !
जग के हित में
तप कर जल का बादल बनना
बादल बन बरस जाना
आसान नहीं है
किसी का बादल बन जाना !
प्रदीप कुमार वर्मा


