वक़्त से प्यार करता है इंसान , इंसान से नहीं बीताये लम्हों से आह भरता है इंसान, इंसान से नहीं वो बरसो साथ जो रहे थे कभी मुस्कुरा कर हमने भी दिन जिए थे कभी अब बीछड के मेरा याराना हम रहते कभी गुमनाम से नहीं वक़्त से प्यार करता है इंसान , इंसान से नहीं वो मौसम आशिकाना था खबर हुई आज वो क्या ज़माना था वक़्त की बदोलत हम यादो में, मिल जाये कही बिच राहो में मुस्कुराये वो ऐसा की हमे जानते नहीं वक़्त से प्यार करता है इंसान.. इंसान से नहीं ~'शागिर्द'