दिल के जख्मों को सीने की अब आदत नही रही ।
शायद उनके मन में अब वो पहले सी इबादत नही रही ।
ये मेरा भरम ही था जो उन्हें पलकों पर बिठा बैठे ,
यकीं मानो इश्क में उनसे अब वो शहादत नही रही ।।

                                       प्रभु पंचतिलक