है समय थोड़ा कठिन तो मुस्कुराना छोड़ दें क्या।

हांथ गर ना मिल सके तो दिल मिलाना छोड़ दें क्या।


हैं शिवा राणा के वंशज हम न झुकना जानते हैं।

शत्रु दल कितना बड़ा हो हम न रुकना जानते हैं।।

है भरोसा बाजुओं पर आजमाना छोड़ दें क्या।

है समय थोड़ा कठिन तो मुस्कुराना छोड़ दें क्या।।


बंद सारी मस्जिदें गिरजा घरों में बंद ताले।

डगमगाती आस्था है बंद हैं मंदिर शिवाले।।

प्रार्थना ना कर सकें तो सिर झुकाना छोड़ दें क्या।

है समय थोड़ा कठिन तो मुस्कुराना छोड़ दें क्या।।


राजनिति बहुत हुई अब राजधर्म सभी निभाएं।

लुट गया घर बार जिनका आज उनके काम आएं।।

रूठ कर जो जा रहे उनको मनाना छोड़ दें क्या।

है समय थोड़ा कठिन तो मुस्कुराना छोड़ दें क्या।।


बस्तियां सुनी पड़ी बाज़ार सारे बंद हैं।

काम धंधे ठप हुए व्यापार सारे बंद हैं।।

शहर बेगाने हुए तो गांव जाना छोड़ दें क्या।

है समय थोड़ा कठिन तो मुस्कुराना छोड़ दें क्या।।


फिर उठेंगे, फिर जुटेंगे जिंदगी मुस्काएगी।

देख लेना सुनी आंखो में चमक फिर आएगी।।

सुनी आंखें नम हैं तो सपने सजोना छोड़ दें क्या।

है समय थोड़ा कठिन तो मुस्कुराना छोड़ दें क्या।।


है समय थोड़ा कठिन तो मुस्कुराना छोड़ दें क्या।

हांथ गर ना मिल सके तो दिल मिलाना छोड़ दें क्या।