ये नशा जो युवाओं के रक्त में घुल रहा है 

चलती फिरती लाशों का ये जहान हो रहा है 

जीवन की बगिया में खिलते पुष्पों को दबा रहा है 

कंकालों और हड्डियों की दुनिया बसा रहा है 

अपराध बढ़ रहे हैं ,गृह कलह हो रही है 

असमय सुहागिनें विधवा हो रही हैं 

बच्चे अनाथ हो रहे हैं, बेवक्त बुढ़ापा आ रहा है 

माँ बाप का सहारा ,बोझ बनता जा रहा है 

ये रक्त पी रहा है ,खोखला जिस्म कर रहा है 

मौत अँधेरे की ओर ,जिंदगी ले जा रहा है 

मान सम्मान जा रहा है ,सोंच गर्त में मिला रहा है 

इंसान मन को कुंठित बना रहा है 

नशे की मार से पूरा देश तड़प रहा है 

ये जीवन सुबह को संध्या बना रहा है 

नशा है बुरा ,इससे जीवन में न कोई आस है 

सोंच ले समझ ले ,अभी भी वक्त तेरे पास है 

फिर से खुशमयी जीवन ,पाने की अभी आस है 

गर समय निकल गया तो बाद में पछतायेगा 

नशा मुक्त भारत का सपना ,सिर्फ सपना रह जायेगा .....