Poetry 1 min read 626.3K reads

मेरी होली।।


हाथों से वो पिचकारी छूटी,छूटे वो पानी के गुबारे,होली से 4 दिन पहले,खेली जाने वाली होली छूटी,ना छूटी तो बस ये ज़िम्मेेदारी।।

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