ये छल, कपट, बेईमानी से
कमाया हुआ पैसा
कहा ले जाओगे तुम
ये उँचे- उँचे मकान
ये महंगी- महंगी करें
ये ज़मीन ये जाय्दात्
इन्हें भी क्या
अपने साथ दफ्नओगे तुम
मिट्टी के बनकर आए हो
एक दिन मिट्टी में मिल जाओगे
सब खरीदने की बात करते हो
अब क्या मिट्टी का भी
मोल लगाओगे तुम
कुछ जीतना है तो लोगों के
दिल को जीतो
कुछ बनाना है तो उनके दिलो
में जगह बनाओ
कुछ पाना है तो लोगों का प्यार पाओ
मरने के बाद कम से कम
उन्हें याद तो आओगे तुम

