सैकड़ो परिधियां खीचीं गयी है
हर परिधि , दोयमता के दर्द से भरी हुई
छोटी त्रिज्या की परिधि
अंगुली उठाती रही है बड़ी त्रिज्या वाली पर ,
उसे ही बताती है
सभी दुर्दशाओं का कारण
और यह खेल चला आ रहा सदियों से
सभी एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते
पर कभी कलंक का दाग खुद पर नहीं लगाते ।
दुनिया का हर समाज
छोटी- बड़ी त्रिज्याओं की तरह
बस परिधि खींच वृत बनाने में मशगूल
और इस दौरान
यथावत रहा है
केंद्र में बेपरिमाप बिंदु की तरह बैठी औरत ।


