करजा के बोझा
माथ पर लदले
मूढ़ , सूद आ सूद के सूद
सधावे खातिर
केतनों पसेना बहावस
बाकि ऊ कमे रह जाला
आ थाक जाला
देह आ मन
जवन सुतहु ना देला तनिको
तले फेरु भोर जरुरत के
रोजो लेखा
खुलत आंखि के सोझा होला ।


करजा के बोझा
माथ पर लदले
मूढ़ , सूद आ सूद के सूद
सधावे खातिर
केतनों पसेना बहावस
बाकि ऊ कमे रह जाला
आ थाक जाला
देह आ मन
जवन सुतहु ना देला तनिको
तले फेरु भोर जरुरत के
रोजो लेखा
खुलत आंखि के सोझा होला ।