लड़े के परेला

बाझे के परेला

हावा भर भर सांसे

हुंकारा डाफे के परेला ,

घामें जर जर 

बरखें भींज भींज

ठंढ़े , दांते किटकिटात

बहुत कुछ छोड़ के

खुशहाली , आराम के जिनगी से

त्याग , बलिदान के राहे

चले बढ़े के परेला ।


जब अपने वाजिब हक

जुगों बरिसों से मिलत मिलत ना मिलो

आश्वासन के झुलुआ में हक

झूठे झुलत मिलो

हक के उठत आवाज पर 

लाठी डंड़ा चलो 

वोट के सियासत में

चुनाव बाद केहु तकबो सुनबो ना करो ;

तब तब

काटों के राहे दऊड़त

कान्हें लेहले झूठा आश्वासन के लाश ,

जरावल जाला

चइली साज के 

ओपर राख के लाश संगे  

मूंहदुब्बरइ के अापन घीव घास ,

आ जरत ओही चइली के 

ले के चले के परेला

अापन वाजिब हक 

ना देबे आला के

रोके आला के 

मूंह जारे ।