
हर हालातों से गुज़र कर देखा है
मैंने खुद से मुकर कर देखा है
लफ्ज़ खामोश हो जाते हैं अक्सर
मैंने खामोशियों में जीकर देखा है
रात नही डसती ना अँधेरा चुभता है
रातों का शोर दिल में बसता है
चाँद नहीं तन्हा सितारे नही बेबस
बादलों से नीर ऐसा बरसता है
क्यों बेबस
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