फिरसे आया है लौटकर दामन में
वो जो कहीं छूट गया था
फिरसे रोयी है आँखे आज टूट कर
वो जो कभी नमी से सूखा था
फिरसे आया है लौटकर दामन में
वही आंसू वही नगमे तन्हाई के
वही जख्म ताज़ा सा वही दर्द जुदाई के
कैसे भूल जाऊ के यादों पर उसका पहरा है
कैसे ना देखूं के जख्म अभी गहरा है
फिरसे आया है लौटकर दामन में...