दस्तक दी है किसी ने दरवाजे पर दिल के कुछ बेकरारी कुछ बेचैनियां है देखूं या ना देखूँ सोचूँ भी तो क्या सोचूँ आने दू या नही कश्मकश में हु अभी वो छीन ना ले करार दिल का वो कर न दे दीवाना मुझे गर हो गयी उल्फत तो भरना न पड़े हर्जाना मुझे आने दू या नही कश्मकश में हूँ अभी...