दिल से आँखों का दरिया उतर गया बहुत रोया कोई कोई निखर गया टुटा किसी का दिल कोई सँवर गया दिल से आँखों का दरिया उतर गया मिन्नते की, लाख समझाया जाना था उसे कहाँ समझ आया ? बस एक खाता मैंने मोहब्बत की जाने क्या ऐसी हमने हरकत की ? तलाश थी उसे बहाने की ढूंढता रहा वजह रुलाने की थक गए जब हम टूट कर बिखर कर रह गए हार कर...