शान बन, अभिमान बन,तू इस धरा की आन बन,

जो करें अपमान तेरा,ना उसका तू सम्मान कर


उठ खड़ी हो वार कर,हुंकार भर, ललकार कर,

इस जहां में वो विजयी,जो पहुंचा दरिया पार कर


क्यूं रूके तू, क्यूं झुके तू,जान जब तक इस बदन में,

क्यूं जिये तू आम जीवन,चमक ज्यों तारा इस गगन में


कर धराशाई वो पर्वत,मार्ग में जो भी अड़े,

राह अपनी खुद बना,चाहे कोई विपदा पड़े


वीरांगना सा तुझमें धैर्य,तू कोई लाचार नहीं,

आ उठा रण में ध्वज, ना कर्म है श्रृंगार ही


तू है सबला तू है रानी, तू चुने तेरी कहानी,

कर तू ऐसा कुछ यहां, दुनिया गाए तेरी जुबानी


तू है दुर्गा, तू है काली,हर सिथती तूने संभाली,

लक्ष्यों की तू ओढ़ चादर, सपनों को साकार कर