इंसान खुदगर्ज हो भला क्या पाता है,फकत अपने दिल का मर्ज छुपता है,संग बीते लम्हे ही मयस्सर जान पड़ते है,वफात ए वक्त अमूमन वो इस सच से रूबरू हो पाता है
इंसान खुदगर्ज हो भला क्या पाता है,फकत अपने दिल का मर्ज छुपता है,
संग बीते लम्हे ही मयस्सर जान पड़ते है,वफात ए वक्त अमूमन वो इस सच से रूबरू हो पाता है