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तालिबान

इंसानियत की मृत्यु है या, प्रलय की है हाला, 

कालाग्नि में लोगों ने वतन, अपना जला डाला, 


समुह कहे, गुट कहे, संगठन का नाम दे, 

हज़ारों की मौत का किसको हम इल्ज़ाम दे,


आसमान से बरस्ती आग कितने घर जलायेगी,

स्वतंत्र स्त्री फिर से अब बुरकों में छुप जाएंगी,


हर लेंगे वो जन के सपने, पौरुष वो दिखलाएंगे,

जन सैलाब सा बन अब दूर देश को जाएंगे, 


हैवनीयत

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