अचानक ही आंखों की पोरे चमक उठी,
कुछ नूर सा जगमगाया है,
जरा गौर से देखा तो पाया,
मेरा मेहबूब सपनों की चौखट पर आया है
आ कुछ देर जरा बैठ कर बात तो कर ले,
कुछ प्यारे से अहसास तो भर ले,
कुछ देर ही सही अपना सा लग तू,
क्या पता अगले ही पल तू कितना पराया है
नशे में धुत हूं, या बिन पिये चढ़ गयी है,
आज अरसो बाद उसने मुझे गले लगाया है,
हम तो सोचे थे नाराज़ हैं हमसे वो,
यू ही शरम से हमने अपना चेहरा छुपाया है
ये घूंघट हटा उसने नैनौ को मिलाया है,
लगता है ये सावन मेरी प्यास बुझाने आया है,
एक बिजली सी कौंध गई है तन मे,
जिस्म का अंग-अग यकायक थरथराया है
मोहब्बत की लौ में कब से जल रही हूं,
आज मेरा दिलनवाज सागर ले आया है,
जरा आंखें खोल कर देखूं तो सही,
ये सच है या पल भर की माया है
सोचती हूं ना नींद खुले,ना सवेरा हो,
पर कम्बक्त भोर को कौन रोक पाया है,
काश कोई सूरज को उगने से रोक दे,
उसे समझाएं कि मैनै अपना ये हिस्सा बड़ी मुश्किलों से पाया है


