बवाल ना कर,बेहाल ना कर,
ऐ मेरे रहगुजर सवाल ना कर,
तेरी चौखट पे आते हैं हम से शैदाई,
नज़रें उठाने में यू मलाल न कर,
मेरे पैगामों का जवाब तो दे,
उऩहे देख के आलम ऐ ख्याल न कर,
वक्त की दुश्मनी ही समझ हमसे,
हमारी कैफियत पर यू सवाल न कर,
तू क्या जाने जमील़ चाहत का नशा,
दिल के उड़ते परीदौं को हलाल न कर,
मेरे होने से ही मगरूर है तू,
मुझ बिन सच्ची मोहब्बत का ख्याल न कर,
तेरे होने से ही खुद पर ऐतबार है हमे,
इस मुकम्मल इमारत को बेहाल न कर,
तुझे देख मुस्कुराते नहीं हंसते हैं हम,
इसे हमसे छीनने की मजाल न कर...
