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चलो अपनी हर नज्म का नाम तुम्हे दे दे,
क्या याद करोगे प्यार का तुम्हे ये इनाम दे दे,
तुम्हे मिलेंगे जमाने में चाहने वाले बहुत,
तुझे हमें चाहने का थोड़ा सा गुमान दे दे

जब कतरा कतरा पाओगे तुम खुद को मेरी नज्मों में,
पढ़ कर के आंसू छलकेंगे टीस उठेगी जख्मों में,
हम पल

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