तेरी खैरियत की दुआ करते हैं,

हर नज़्म तुझ पर अदा करते हैं


हम फरेबी नहीं है रहबर,

हमसे ही शख्स वफ़ा करते हैं


सूकून ए दिल मययसर है तुमसे,

तुझ पर ही इख्तियार करते हैं


कभी इस राह से गुजर तो सही, 

चिराग-ए-रह गुजार करते हैं


फिर से देखूं हस्ती‌ हुई निगाहे, 

जमीन को चारबाग करते हैं


तेरी मासूम सी हंसी पर हम, 

अपनी खुशियां निसार करते हैं


तू हो ना खफा कभी हमसे,

यही दुआ बार-बार करते हैं