सोचते है रिहा कर दे तुम्हे इस उलझे से रिश्ते से,
उन बातो से उन जज्बातों से,
उन लम्हों से उन एहसासों से

प्रश्न ये है कि हमने तुम्हे बांधा कब होगा?

अमूमन ये हुआ होगा कि,
हम जब हाथ थामे चल रहे होंगे तो,
तेरा कुछ मुझ में समा गया होगा

या फिर जब दिल मिले होंगे,
तो कोई एक नन्ही सी धड़कन का कतरा तू मुझ में छोड़ गया होगा
 
अब ये तेज सी धड़कन हर सांस में धड़कती है,तो तू मुझमें कैद सा महसूस होता है,

ये रिहाई मुश्किल है, तू बता दिल धड़कना बंद कैसे हो,
यकीनन तुझे इंतजार करना होगा, इस दिल की रफ्तार के थमने का,

फिर भी हम कोशिश करेंगे की तुमसे दूरी बना ले,
अपनी वो छोटी सी धड़कन कहीं गर्त में दबा ले,
बेजार से हो जाए चीखती दिल की आवाज़ों से,
मौन बन जाए तुझसे जुड़े एहसाओं से,

तू जानता है, असल में कैदी तू नही है,
तुम्हे कैद कर हम खुद ने कैद हो गये हैं