जब दस्तक दी दरवाजे पर.. हम बोले भीतर मत आना..

वो मुस्काए ओर फिर बोले ..चाहत से कैसा घबराना..

हम बोले तुम परछाई हो.. एक धोखा हो रूसवाई हो..

जो बादल सा छट जाएगी.. ऐसे से क्या दिल बहलाना..

वो बोले जीवन एक ही है..माना बेड़ियां जकड़े है..

इच्छाओं से गुरेज ना कर.. सपनों को कैसा ठुकराना..

हम बोले दिल को तोड़ोगे..मझधार में मुझ को छोड़ोगे..

पल भर में छू हो जाओगे.. बस बंद करो मुझको समझाना..

वो बोले तू ऐतबार तो कर.. जिंदा है सच्चा प्यार तो कर..

यू पत्थर बन कर जीना..चल मोम सा खुद को पिघलाना..

हम बोले फिर एक वादा कर..संग चलने का इरादा कर..

दरवाजा तब ही खोलूंगी..जब साथ रहेगा रोजाना..

वो बोले हम तो एक ही हैं.. तुम जान से प्यारे हमको हो..

मैं साथ हूं तेरे हर पल में.. वादों में फिर क्यूं बधंवाना..

हम बावरे से दौड़ेगै.. दुनिया से नाता जोड़ेंगे..

सपनों सा महल बनाएंगे.. अब अपनी सूरत दिखलाना..

तू कविता बन आवाज बनूं..तू गीत बने मैं साज बनूं..

मुझ पर एक पल ऐतबार तो कर..ना पछताएगी रोजाना

हम सोचे सब सच्चाई है..किस्मत ही साथ ले आई है..

दरवाजा जैसे ही खोला..ओझल था मेरा दिवाना..