ख्वाबों की बस्ती पर काबू कर,कैसे जी पाते हो,कल भी चोर थे तुम,आज भी चोर ही कहलाते हो..
ख्वाबों की बस्ती पर काबू कर,कैसे जी पाते हो,
कल भी चोर थे तुम,आज भी चोर ही कहलाते हो..