मोहब्बत की चाह में बेहिस भटकता क्यूं है,उम्मीद-ए-सहारा रख कोई दिल के करीब पाएगा,भटकना है तो अपनी खुशियों को भटक,तेरा चाहने वाला खुद तेरे दरवाजे तक आएगा
मोहब्बत की चाह में बेहिस भटकता क्यूं है,उम्मीद-ए-सहारा रख कोई दिल के करीब पाएगा,
भटकना है तो अपनी खुशियों को भटक,तेरा चाहने वाला खुद तेरे दरवाजे तक आएगा