कारी बदरा छाए,
मन मेरो भरमाए,
साजन मेरो दूर भयो,
कोई दियो बुलाए
टिप टिप बूंदे बरखा की,
तन मेरो झन्नाए,
मेरो यौवन भीग भीग,
सिसक सिसक रह जाए
पी मेरो दूर देश,
पतझड़ सा सूखा छाए,
जिस मौसम संग नाच सके,
रूक काहे ना जाए
बंसी बज्जिया कान्हा जी,
क्यूं जादू ना दिखलाए,
जो तू चाहे मेरो पी,
भोर भए आजाये


