जो शख्स चला गया उसे आवाज क्या देना,

अपनी बेगुनाही का जवाब क्या देना,

इतनी उलझनों में है कि क्या बताए,

इन राहों की पेचीदगियों का हिसाब क्या देना


आइना देखें तो दिखते हो तुम साथ हमें,

ताउम्र खुद को हिजाब क्या देना,

हां अक्सर तुम कहां करते थे गुलिस्तां है हम,

इन हाथों को फिर से गुलाब क्या देना


मुमकिन नहीं अब सुकून का मययसर होना,

यू उम्मीदे आब ए हयात क्या देना,

तेरी रूसवाई खाएं जाती है हमे दिन ब दिन,

इस बीमार दिल को इलाज क्या देना