झिलमिलाती रात हो, अनकही सी बात हो,
प्रेममय जज़्बात हो और तुम हो
हृदय में माधुर्य हो, चमकता सौंदर्य हो,
समा में आश्चर्य हो और तुम हो
जगमगाते नैन हो, धडकनौ में चैन हो,
जन्मों से लम्बी रैन हो और तुम हो,
चुलबुली सी हंसी हो, अधरो में जो बसी हो,
हालात भी दिलनशी हो और तुम हो
मीठे से तेरे बोल हो, मिश्री के जैसे घोल हो,
मन में जो बजते ढोल हो और तुम हो
आलिंगन की ओट हो, कंपकंपाते होंठ हो,
मन में कोई ना खोट हो और तुम हो
बस तू मेरी परछाई हो, माहौल में शहनाई हो,
न फिर कभी तन्हाई हो और तुम हो
इस मोह का एक जाल हो, चाहे कोई कंगाल हो,
हम यूं ही मालामाल हो और तुम हो
ना किसी की याद हो, बस यही फरियाद हो,
ये पल यू ही आबाद हो और तुम हो
ये वक्त यही पर कैद हो, चाहे सुबह मुस्तैद हो,
महोबबत यू ही बैकैदा हो और तुम हो


