सोती पलकें अक्सर फड़फड़ाती हैं,

तेरी याद दबे पांव चली आती हैं,

धडकनों का काफिला रफ़्तार पकड़ लेता है,

नैनो की कोरै यकायक भीग जाती हैं


हम बेबस से अचानक उठते हैं ऐसे,

तेरी सूरत आंखों में उभर आती है,

बिलखते हुए कब हम सोते हैं जाने,

कुछ पलों में जालिम सहर हो जाती है