मीलों पीछे छूटा बचपन

वो हंसी ठिठोली, सखियों की टोली

आँख मिचौली, रंग-रंगोली

ठहर गए हैं, झिझक गए हैं

उम्र की दहलीज़ पर अटक गए हैं

मुझसे छूटा मेरा अपनापन, मीलों पीछे छूटा बचपन


जीवन की कुछ अभिलाषाएँ

उमड़-घुमड़ कर अकुलाएँ

ऐसी आतुर ऐसी बलवती

जैसे हो मेरा लड़कपन, मीलों पीछे छूटा बचपन


कुछ साथी रह में छूट गए

कुछ मेरे अपने रूठ गए

उनसे मिलने को तरसे ये मन, मीलों पीछे छूटा बचपन


मधुर रसीला भोला बचपन

नटखट छैल छबीला बचपन

पचपन में भी याद आए बचपन

बड़प्पन में नहीं वो रसपन, मीलों पीछे छूटा बचपन


पूनम निगम

लुधियाना