चलो कोई गीत लिखते हैं,
मेरी हार तुम्हारी जीत लिखते हैं,
तुम्हारे नियमों वाली दुनिया में,
मेरे लिए कुछ नई रीत लिखते हैं ।
ये नहीं तो एक काम करते हैं,
सारी बदसलूकी मेरे नाम करते हैं,
देखते हुए मेरी चरित्रहीनता को,
तुम्हें पुरुषोत्तम राम करते हैं ।।
तो फिर तुम्हारे प्यार के किस्सों को पढ़ते हैं,
उसमें मेरी बेवफ़ाई के हिस्सों को गढ़ते हैं,
तुम्हारे अमर प्रेम के स्वर्ण हार में,
मेरे झूठे प्यार के किस्सों को जड़ते हैं ।।


