आओ आज फिर मुलाकात कर ले 

उसी जगह जहां हमेशा मिला करते थे

फिर वही मीठी सी पुरानी यादें ताजा कर ले 

आओ ... आज फिर मुलाकात कर ले 

 

माना कि अब पहले जैसी बात नहीं है

तुम और मैं अब साथ नहीं है 

जिंदगी के रंगों में हम मशगूल हो चुके हैं   

उन अनूठे जज्बातों से काफी दूर हो चुके हैं 

पर आज वक्त निकालकर 

सारे गिले-शिकवे निजाद कर ले 

आओ... आज फिर मुलाकात कर ले

 

 हां ...वाकिफ हूं मैं इस बात से 

कि तुम्हें खामोश ही रहना पसंद है 

पर नजरों से तो तुम भी 

बहोत कुछ कह दिया करते थे 

बहोत कुछ कहना है तुमसे 

वो अधूरे जवाब मेरे सवालों के 

जिन्हें तुम बगैर दिए चले गए थे 

उन सभी जवाबो को मुकम्मल करने 

कुछ तुम्हारी सुनने और बहोत कुछ मेरी सुनाने को आओ ...आज फिर मुलाकात कर ले

 

अंजान हो तुम इस बात से

कि वो सूखा गुलाब आज भी मैंने

किताबों के पन्नों में कहीं दबा रखा है 

बहोत कुछ लिखा है पर सब से छुपा रखा है 

चलो आज रूबरू होकर सब बयां कर ले 

मिलकर फिर यह शाम हसीन कर ले 

आओ....

आज फिर मुलाकात कर ले