स्वर्ग से सुन्दर मेरा देश,

सतरंगी बस एक पुकार,

जन - जन का एक सहारा,

विभिन्नता में भी यहाँ है, 'एकता ',

ना हो जहाँ कोई भेदभाव,

मन में एक दीप जलाता,

अँधेरे में उजाला भर जाता,

स्वच्छता का एक प्रतीक जो,

हर उजियाला घंटी की धुन से,

हर इक शाम अजान के नाम,

ये हमारा जो प्रेम वतन,

उदासी में आशा की लो,

उड़ान में एक आज़ादी - सी

हर एक पिंजड़ा तोड़कर,

आज़ाद रहें ये खुला आसमां,

तैरकर मुसीबतों को कह दे,

हम पर अब ना कोई बंधन,

बीच में ना कोई भेदभाव,

हमने सीख लिया जीवन से,

आज़ादी का अर्थ हर इक बार,

हर इक मौसम रंगीन बना है,

सतरंगी बात एक पुकार,

स्वर्ग से भी सुन्दर मेरा देश,

पूजा सैनी